बगलामुखी देवी आरती- कथा

बगलामुखी देवी माता साधना शीघ्र सफलता देने वाली,एवं काले जादू जैसे भयंकर तंत्रो मारण-मोहन-उच्चाटन-वशीकरण-विद्वेषण-स्तंभन से रक्षा करती हैं |

माँ पीताम्बरा की पूजा करने से मुक़दमे मे जीत, झगड़ो मे सफलता,  बॉस से अनबन दूर होती है, बच्चों की गलत आदतों व संगत से छुटकारा मिलता है |

 परिवार मे अनुचित प्रेम-प्रपंच ख़त्म होते हैं, विद्यार्थी को विद्या प्राप्त होती है, अर्थाथी को धन, पुत्र चाहने वाले को पुत्र, सुयोग्य पति या पत्नी को चाहने को सुयोग्य वर -वधु मिलता है |

व्यापारियों-राजनीतिज्ञो-प्रोफेशनलो-खिलाड़ियों-कर्मचारियों- कलाकारों के मार्ग की बाधा दूर कर उन्हें उनके लक्ष्य की प्राप्ति कराती हैं |

माँ के व्रत के प्रभाव व आशीर्वाद से मैंने हज़ारो जिंदगी संवरते  देखी है, उनमें से मेरे कुछ प्रिय लोगों के अनुभव  ब्लॉग मे  साझा  करता  रहूंगा, आपसे भी प्रार्थना है कि माँ की दयादृष्टि से जो परिवर्तन आपके जीवन मे हुये हैं, शेयर करें तथा माँ की पूजा का प्रचार करें, ताकि लोग क़ब्र, मजार, दरगाह, मौलाना, तांत्रिको, ओझाओ के चक्कर मे फंसने के बजाय माँ बगलामुखी की पूजा करके काले जादू जैसे तंत्र – मंत्र -जादू -टोना -भूत -प्रेत -ग्रह-वास्तु आदि से अपनी , परिवार व अपनों की रक्षा खुद करने मे समर्थ हों |

बगलामुखी देवी माता व्रत विधि

यह व्रत बृहस्पतिवार को किया जाता है | सुबह उठकर नहा लें, यदि संभव हो तो पीला कपड़ा ही पहने नहीं तो कोई भी चलेगा, मन मे माँ बगलामुखी नमस्तुभ्यं का जाप करते रहें |

पूजा मे पीली सामग्री का प्रयोग करें :- हल्दी या केसर,  बेसन का लड्डू या पीली बर्फी,  पीला फूल या माँ का पसंदीदा चंपा पुष्प,  पीला वस्त्र, किसमिस, पीली सरसों आदि |

घर के मंदिर मे पीला वस्त्र बिछाकर उस पर पीली सरसों डालकर माँ की यन्त्र सहित फोटो पश्चिम दिशा मुख करके स्थापित कर दें, सामने पीतल के कलश मे जल मे हल्दी डाल कर रख दें | 7-14 या 21 व्रत का संकल्प लेकर  माँ की कथा पढ़ें एवं आरती करें,  पीली सरसों थोड़ी घर-कार्यस्थल पर डाल कर शेष पंछिंयों को डाल दें व जल भी थोड़ा सभी पर छिड़ककर पौंधो मे डाल दें |

व्रत मे एक समय मीठा भोजन लें व एक समय फलाहार करें |

उद्यापन के दिन 7 या 14 स्त्रियों को हल्दी /केसर टीका लगा कर  लड्डू का प्रसाद दें तथा भेंट मे माँ की फोटो व कथा-आरती की पत्रक  दें |

देवी बगलामुखी माँ आरती

सरल -शीघ्र सफलतादायक आपकी  समस्त मनोकामना पूर्ण करने वाली महाविद्या देवी बगलामुखी माता की आरती नित्य करें| 

 

जय पीताम्बरधारिणी जय सुखदे वरदे, मातर्जय सुखदे वरदे ।  

भक्त जनानां क्लेशं भक्त जनानां क्लेशं सततं दूर करे ।।   

                                                                    जय देवि जय देवि ।।१।।

असुरैः पीडितदेवास्तव शरणं प्राप्ताः, मातस्वशरणं प्राप्ताः 

धृत्वा कौर्मशरीरं धृत्वा कौर्मशरीरं दूरीकृतदुःखम् ।।     

                                                                     जय देवि जय देवि ।।२।।

मुनिजनवन्दितचरणे जय विमले बगले, मातर्जय विमले बगले। 

संसारार्णवभीतिं संसारार्णवभीतिं नित्यं शान्तकरे ।।                

                                                                       जय देवि जय देवि ।।३।।

नारदसनकमुनीन्द्रैर्ध्यातं पदकमलं मार्तध्यातं पदकमलं 

हरिहरद्रुहिणसुरेन्द्रैः हरिहरद्रुहिणसुरेन्द्रैः सेवितपदयुगलम् ।।       

                                                                       जय देवि जय देवि ।।४।।

काञ्चनपीठनिविष्टे मुदगरपाशयुते, मातर्मुदगरपाशयुते । 

जिह्वावज्रसुशोभित जिह्वावज्रसुशोभित पीतांशुकलसिते ।।                         

                    जय देवि जय देवि ।।५।।

बिन्दुत्रिकोणषडस्त्रैरष्टदलोपरिते, मातरष्टदलोपरिते 

षोडशदलगतपीठं षोडशदलगतपीठं भूपुरवृत्तयुतम् ।।                   

                    जय देवि जय देवि ।।६।।

इत्थं साधकवृन्दश्च़िन्तयते रूपं मातश्च़िन्तयतेरूपं 

शत्रुविनाशकबीजं शत्रुविनाशकबीजं धृत्वा हृत्कमले ।।                                       

                    जय देवि जय देवि ।।७।।

अणिमादिकबहुसिद्धिं लभते सौख्ययुतां, मातर्लभते सौख्ययुतां 

भोगानभुक्त्वा सर्वान् भोगानभुक्त्वा सर्वान् गच्छति विष्णुपदम् ।।

                    जय देवि जय देवि ।।८।।

पूजाकाले कोsपि आर्तिक्यं पठते, मातरार्तिक्यं पठते 

धनधान्यादिसमृद्धः धनधान्यादिसमृद्धः सान्निध्यं लभते ।।                                                   जय देवि जय देवि ।।९।।

 

माँ बगलामुखी व्रत कथा

भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा “हे प्रिये ! अब मै तुमसे देवी बगलामुखी के प्राकट्य की कथा कहता हूँ, जिन्होंने तीनों लोको को अपनी स्तंभन शक्ति से बांध रखा है। जिसके कारण समस्त सृष्टि अपने– अपने स्थान पर गतिशील होकर भी नियत कक्षा मे टिकी हुयी है, एवं आपस मे टकराकर नष्ट नहीं हो रही। जिनकी पूजा करने से सर्वत्र विजय होती है, तथा कोई भी तंत्र–मंत्र हानि नहीं पंहुचाता |”

भगवान ने फिर कहा

” यह प्राकट्य कथा समुद्र मंथन के समय की है। वैसे तो बगलामुखी देवी सभी युगों  कल्पो मे विद्यमान रहती हैं, किन्तु परम दयालु देवी पीतांबरा शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करने वाली होने से, इनकी पूजा का असुरो  दुष्ट स्वभाव वाले मनुष्यो द्वारा दुरूपयोग होता है। तो इसे गोपनीय कर दिया जाता है|

 

देवों  असुरो ने मंदराचल को मथानी  नागराज वासुकी को रस्सी बना कर वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को समुद्र प्रारंभ कर दिया। जिसके घूमने की गति  घूर्णन के दबाव से समुद्र का समस्त जल पृथ्वी को डूबाकर नष्ट करने को उद्यत होने लगा | साथ ही नागराज वासुकि की भयंकर विष– फुंकार [संसार का प्रचंडतम विष] , जो श्वांस– प्रश्वांस के रूप में असुरों की मृत्यु का कारण बन रही थी। इन दोनों समस्याओं से  श्री हरी सहित हम सभी लोग चिंतित हो गए तो श्री हरी समस्या के हल के लिए हरिद्वा सरोवर पर देवी की तपस्या  ध्यान करने लगे |

 

वैशाख शुक्ल अष्टमी को

देवी बगलामुखी ने श्री हरी को दर्शन देकर मनोरथ पूरा करने का वचन दिया एवं उसी समय उस समुद्री तूफ़ान रूपी सुनामी को रोककर सागर को वहीं स्तंभित कर दिया। साथ ही विष की ऊर्जा को भी शीतल दाहमुक्त एवं हानिरहित मनोरथ पूर्ण होने तक कर दिया। जिससे सृष्टि की रक्षा  समुद्र मंथन संभव हो सका | जब मंथन के दबाव से मंदराचल पाताल मे धसने लगा तो विष्णु जी ने कूर्मावतार लेकर मंदराचल को धारण किया  देवी पीतांबरा ने मंदराचल को कूर्मावतार की पीठ पर स्थिर कर दिया|  देवी बगलामुखी के बुद्धि पर प्रभाव से असुरो ने कोई उत्पात समुद्र मंथन के समय नहीं किया  केवल मदिरा  घोड़ा लेकर भी  भ्रमित शांत रहे|

 

अमृत निकलने पर जब देवों  दैत्यो मे संघर्ष होने लगा तो देवी ने दैत्यो की संपूर्ण बुद्धि हर ली, वे श्री हरी के मोहिनी रूप मे उलझकर मदिरा को अमृत समझ कर पी गये | 

मेरे गले मे हलाहल विष को भी उन्होने स्तंभित कर दिया  इस तरह संपूर्ण समुद्र मंथन 14 रत्न उनकी कृपा से प्राप्त हुये |

जो इस कथा को सुनता  सुनाता है, उसके समस्त मनोरथ पूरे होकर सारे कष्ट दूर होते हैं

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